- महाशिवरात्रि से पहले महाकाल दरबार में अंतरराष्ट्रीय पुष्प सज्जा की शुरुआत: 40 से अधिक विदेशी फूलों से सजेगा परिसर; बेंगलुरु से आए 200+ कलाकार तैयारियों में जुटे
- उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के विशेष पूजा-विधि: स्वस्ति वाचन के साथ खुले पट, राजा स्वरूप में सजा दरबार
- महाशिवरात्रि से पहले उज्जैन में हाई अलर्ट: देवास गेट से रेलवे स्टेशन तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन, 100 पुलिसकर्मी पांच टीमों में तैनात
- महाशिवरात्रि पर महाकाल दर्शन के लिए डिजिटल कंट्रोल रूम, गूगल मैप से तय होगा आपका रास्ता: जाम लगते ही मैप से गायब होगा रूट, खाली पार्किंग की ओर मोड़ दिया जाएगा ट्रैफिक
- महाकाल मंदिर में अलसुबह भस्मारती की परंपरा, वीरभद्र के स्वस्तिवाचन के बाद खुले चांदी के पट; पंचामृत अभिषेक और राजा स्वरूप में हुआ दिव्य श्रृंगार
रैन बसेरे:गर्मी में कूलर तो ठंड में हीटर, एलईडी भी; रैन बसेरे में होटल जैसी सुविधाएं
- शहर में छह रैन बसेरे, प्रत्येक में 30 लोगों के ठहरने की व्यवस्था, यहां गरीब ही नहीं मध्यमवर्गीय लोग भी रुकने आते
- नानाखेड़ा स्थित रैन बसेरे में गर्मी में कूलर तो ठंड में रूम हीटर तक का प्रबंध किया गया
घर से दूर बगैर पैसे के आराम से रात गुजारने के लिए शहर में 6 रैन बसेरे बनाए गए थे। इनके संबंध में आए दिन आने वाली शिकायतों को निपटाने के लिए निगम ने मॉनीटरिंग बढ़ाई तो इनकी व्यवस्था में भी सुधार हुआ है। हाल ही में नानाखेड़ा स्थित रैन बसेरे को रेनोवेट किया गया है। जहां होटल जैसी सुविधाएं लोगों को मिल रही है। चुनाव बाद बाकी पांच रैन बसेरा को भी रेनोवेट करने की योजना है। नानाखेड़ा स्थित रैन बसेरे में गर्मी में कूलर तो ठंड में रूम हीटर तक का प्रबंध किया गया है।
साथ ही साफ-सुथरा बेड और नहाने के लिए साफ-सुथरा बाथरूम। व्यवस्था सुधरने के बाद अब यहां गरीब ही नहीं मध्यमवर्गीय लोग भी ठहरने के लिए आते हैं। उनका मानना है कि रात ही तो रुकना है। इसके लिए होटल में हजार से 1500 रुपए खर्च करना पड़ेंगे। सभी व्यवस्था यहीं मिल रही है तो वहां क्यों जाएं। शहर में छह रैन बसेरे हैं, जिनमें 180 लोगों के रुकने की व्यवस्था है। नानाखेड़ा के रैन बसेरे को रेनोवेट करने के बाद यहां लोगों के ठहरने की संख्या भी बढ़ गई है। इसकी क्षमता 30 लोगाें की है। यह अधिकांश समय आधा भरा रहता है।
बगैर पैसे में रुकने की व्यवस्था
नानाखेड़ा के रैन बसेरे के अलावा देवास गेट, सिविल अस्पताल, घास मंडी, दूध तलाई और फाजलपुरा में इन्हें बनाया गया है। प्रत्येक में 30-30 लोगाें के ठहरने की व्यवस्था की है। यहां साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। इनमें वह लोग रुकते हैं जो शहर से दूर रहते हैं और रोज घर जाना संभव नहीं हैं। ऐसे में वह यहीं रुक जाते हैं।
मजबूरी में ठहरते थे यहां, अब खुशी-खुशी रुकते हैं
अशोकनगर के परमानंद नानाखेड़ा के रैन बसेरे में साल भर से रह रहे हैं। वह यहां होटल पर ही काम करते हें, बताते हैं कि पहले परेशानी होती थी लेकिन अब काफी सुधार हुआ है। गर्मी में कूलर भी होते हैं। मनोरंजन के लिए टीवी भी है। इसी तरह नरवर का गोपाल (बस कंडक्टर) और विक्रम सूर्यवंशी (ड्राइवर) भी यहां साल भर से रुक रहे हैं। उनका कहना है कि रोज घर जाना संभव नहीं होता है। यहां बगैर पैसे में रुक जाते हैं। इसी तरह दूध तलाई के रैन बसेरे में मजदूरी करने वाले नागेश्वर और माकड़ौन के राहुल लंबे समय से रुक रहे हैं।
सुधार किया तो व्यवस्था भी बदली
नानाखेड़ा के रैन बसेरे को रेनोवेट किया है। इससे व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। यहां होटल जैसी ही सुविधा रहती है। गर्मी में कूलर रहता है तो मनोरंजन के लिए टीवी का भी प्रबंध है। बाकी पांच रैन बसेरों में भी चुनाव बाद रिनोवेशन किया जाएगा। लोग वहां ज्यादा से ज्यादा पहुंचे। ऐसा प्रबंधन किया जाएगा।